बांझपन का आयुर्वेदिक उपचार !! Banjhpan Ka Ayurvedic Upchar

बांझपन का आयुर्वेदिक उपचार [ Banjhpan Ka Ayurvedic Upchar ] : 
  • बांझपन को दूर करने के लिए #सफेद_आक की छाया में सूखी जड़ को महीन पीसकर, एक-दो ग्राम की मात्रा में 250 मिलीलीटर गाय के दूध के साथ सेवन स्त्री को करायें। शीतल पदार्थो का पथ्य देवें। इससे बंद ट्यूब व नाड़ियां खुलती हैं, व मासिक-धर्म व गर्भाशय की गांठों में भी लाभ होता है।
  • बांझपन का इलाज करने के लिए सुबह के समय 5 कली #लहसुन की चबाकर ऊपर से दूध पीयें। यह प्रयोग पूरी सर्दी के मौसम में रोज करने से स्त्रियों का #बांझपन दूर हो जाता है।
  • बांझपन बीमारी से निजात पाने के लिए #मासिक-धर्म ठीक होने पर भी यदि संतान न होती हो तो रूई के फाये में फिटकरी लपेटकर पानी में भिगोकर रात को सोते समय योनि में रखें। सुबह निकालने पर रूई में दूध की खुर्चन सी जमा होगी। फोया तब तक रखें, जब तक खुर्चन आता रहे। जब खुर्चन आना बंद हो जाए तो समझना चाहिए कि #बांझपन रोग समाप्त हो गया है।
  • बांझपन रोग को दूर करने के लिए बांझ स्त्री (जिस औरत के बच्चा नहीं होता) को #गाजर के बीजों की धूनी इस प्रकार दें कि उसका धुंआं रोगिणी की बच्चेदानी तक चला जाए। इसके लिए जलते हुए कोयले पर गाजर के बीज डालें। इससे धुंआ होगा। इसी धूनी को रोगिणी को दें तथा रोजाना उसे गाजर का रस पिलायें। इससे #बांझपन दूर हो जाएगा।
  • बांझपन दूर करने के लिए मासिकधर्मोंपरान्त आठवे दिन से नित्य #अजवाइन और #मिश्री 25-25 ग्राम लेकर 125 मिलीलीटर पानी में रात्रि के समय एक मिट्टी के बर्तन में भिगों दे तथा प्रात:काल के समय ठंडाई की भांति घोट-पीसकर सेवन करें। भोजन में मूंग की दाल और रोटी बिना नमक की लें। इस प्रयोग से गर्भ धारण होगा।
  • बांझपन से मुक्ति के लिए स्त्री का माथा दुखे तो समझना चाहिए कि गर्भाशय खुश्क है। इसके लिए #सेंधानमक, #लहसुन, #समुद्रफेन 5-5 ग्राम की मात्रा में पीसकर रख लें, फिर 5 ग्राम दवा को पानी में पीसकर रूई में लगाकर योनि के अन्दर गर्भाशय के मुंह पर सोते समय 3 दिन तक रखना चाहिए। इससे गर्भाशय की खुश्की मिट जाती है।
  • बांझपन से परेशान है तो स्त्री का अंग कांपे तो गर्भाशय में वायुदोष समझना चाहिए। इसके लिए #हींग को पीसकर #तिल के तेल में मिलाकर रूई में लगाकर गर्भाशय के मुंह पर 3 दिनों तक लगातार रखना चाहिए। इससे गर्भ अवश्य ही स्थापित हो जाता है।
  • बांझपन की परेशानी को दूर करने के लिए स्त्री की कमर में दर्द हो रहा हो समझ लेना चाहिए कि उसके गर्भाशय के अन्दर का मांस बढ़ गया है। इस रोग के लिए हाथी के खुर को पूरी तरह जलाकर बिल्कुल बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। इस 5 ग्राम चूर्ण को काला जीरा के साथ मिलाकर इसमें अरण्डी का तेल भी मिला लें। इस तेल को एक रूई के फाये में लगाकर योनि में गर्भाशय के मुंह पर लगातार 3 दिन तक रखें। इससे इस रोग में लाभ होता है।

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