वट सावित्री व्रत पूजा विधि || Vat Savitri Vrat Puja Vidhi || Vat Savitri Vrat Puja Kaise Kare

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वट सावित्री व्रत पूजा विधि || Vat Savitri Vrat Puja Vidhi || Vat Savitri Vrat Puja Kaise Kare

वट सावित्री व्रत सौभाग्य को देने वाला और संतान की प्राप्ति में सहायता देने वाला व्रत माना गया है। भारतीय संस्कृति में यह व्रत आदर्श नारीत्व का प्रतीक बन चुका है। इस व्रत की तिथि को लेकर भिन्न मत हैं। स्कंद पुराण तथा भविष्योत्तर पुराण के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को यह व्रत करने का विधान है, वहीं निर्णयामृत आदि के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या को व्रत करने की बात कही गई है। वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की त्रयोदशी तिथि से शुरू होकर लगातार तीन दिन तक बनाया जाता हैं ! यानी की ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि के दिन समाप्त होता हैं ! Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Trivedi द्वारा बताये जा रहे वट सावित्री व्रत पूजा विधि || Vat Savitri Vrat Puja Vidhi को पढ़कर आप भी वट सावित्री व्रत की पूजा विधि पूर्वक कर सकते हैं ! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें : 9667189678 Vat Savitri Vrat Puja Vidhi By Astrologer Acharya Pandit Lalit Trivedi

वट सावित्री व्रत पूजा विधि || Vat Savitri Vrat Puja Vidhi || Vat Savitri Vrat Puja Kaise Kare

वट सावित्री व्रत पूजा सामग्री || Vat Savitri Vrat Puja Samagri

बड की डाली या पेड़ के पास जाकर कर सकते है पूजा, सिंदूर, रोली, फूल, अक्षत, चना, फल और मिठाई ! 

वट सावित्री व्रत पूजन विधि || Vat Savitri Vrat Pujan Vidhi

सुहागन स्त्रियां वट सावित्री व्रत के दिन सोलह श्रृंगार करके सिंदूर, रोली, फूल, अक्षत, चना, फल और मिठाई से सावित्री, सत्यवान और यमराज की पूजा करें। 

वट सावित्री व्रत करने वाली स्त्रियों को चाहिए कि वह वट के समीप जाकर जल का आचमन लेकर कहे-ज्येष्ठ मात्र कृष्ण पक्ष त्रयोदशी अमुक वार में मेरे पुत्र और पति की आरोग्यता के लिए एव जन्म-जन्मान्तर में भी मैं विधवा न होऊं इसलिए सावित्री का व्रत करती हूं।

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वट के मूल में ब्रह्म, मध्य में जर्नादन, अग्रभाग में शिव और समग्र में सावित्री है। 

हे वट! अमृत के समान जल से मैं तुमको सींचती हूं । ऐसा कहकर भक्तिपूर्व एक सूत के डोर से वट को बांधे और गंध, पुष्प तथा अक्षत से पूजन करके वट एवं सावित्री को नमस्कार कर प्रदक्षिणा करे | 5,11, 21, 51 या 108 बार बरगद के पेड़ की परिक्रमा करें | अंत में सावित्री-सत्यवान की कथा किसी पंडित जी या आचार्य से सुनें या स्वयं पढ़ें | सुनने के बाद पंडित जी को इच्छानुसार दक्षिणा दें | फिर प्रसाद में चढ़े फल आदि ग्रहण करने के बाद शाम के वक्त मीठा भोजन ग्रहण करें |

वट सावित्री व्रत के लाभ और फायदे || Vat Savitri Vrat Ke Labh & Fayade

वट सावित्री व्रत करने से पतिव्रत स्त्री की पति की लम्बी आयु होती हैं साथ ही साथ उसके पुत्र की प्राप्ति और पुत्र की लम्बी आयु होती हैं |

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