श्री सूर्याष्टकम् ( Shri Suryashtakam ) Shri Surya Ashtakam

श्री सूर्याष्टकम्, Shri Suryashtakam, Shri Suryashtakam Ke Fayde, Shri Suryashtakam Ke Labh, Shri Suryashtakam Benefits, Shri Suryashtakam Pdf, Shri Suryashtakam in Sanskrit, Shri Suryashtakam Lyrics. 

10 वर्ष के उपाय के साथ अपनी लाल किताब की जन्मपत्री ( Lal Kitab Horoscope  ) बनवाए केवल 500/- ( Only India Charges  ) में ! Mobile & Whats app Number : +91-9667189678

नोट : यदि आप अपने जीवन में किसी कारण से परेशान चल रहे हो तो ज्योतिषी सलाह लेने के लिए अभी ज्योतिष आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी पर कॉल करके अपनी समस्या का निवारण कीजिये ! +91- 9667189678 ( Paid Services )

30 साल के फ़लादेश के साथ वैदिक जन्मकुंडली बनवाये केवल 500/- ( Only India Charges  ) में ! Mobile & Whats app Number : +91-9667189678

हर महीनें का राशिफल, व्रत, ज्योतिष उपाय, वास्तु जानकारी, मंत्र, तंत्र, साधना, पूजा पाठ विधि, पंचांग, मुहूर्त व योग आदि की जानकारी के लिए अभी हमारे Youtube Channel Pandit Lalit Trivedi को Subscribers करना नहीं भूलें, क्लिक करके अभी Subscribers करें : Click Here

श्री सूर्याष्टकम् || Shri Suryashtakam

श्री सूर्याष्टकम् श्री पण्डित रघुनाथ शर्मा द्वारा रचियत हैं !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें : 9667189678 Shri Suryashtakam By Acharya Pandit Lalit Trivedi

श्री सूर्याष्टकम् || Shri Suryashtakam

॥ सूर्याष्टकम् ॥

श्रीगणेशाय नमः ।

प्रभाते यस्मिन्नभ्युदितसमये कर्मसु नृणां,

प्रवर्तेद्वै चेतो गतिरपि च शीतापहरणम् ।

गतो मैत्र्यं पृथ्वीसुरकुलपतेर्यश्च तमहं,

नमामि श्रीसूर्यं तिमिरहरणं शान्तशरणम् ॥ १॥

त्रिनेत्रोऽप्यञ्जल्या सुरमुकुटसंवृष्टचरणे,

बलिं नीत्वा नित्यं स्तुतिमुदितकालास्तसमये ।

निधानं यस्यायं कुरुत इति धाम्नामधिपति,

नमामि श्रीसूर्यं तिमिरहरणं शान्तशरणम् ॥ २॥

मृगाङ्के मूर्तित्वं ह्यमरगण भर्ताकृत इति,

नृणां वर्त्मात्मात्मोक्षिणितविदुषां यश्च यजताम् ।

क्रतुर्लोकानां यो लयभरभवेषुप्रभुरयं,

नमामि श्रीसूर्यं तिमिरहरणं शान्तशरणम् ॥ ३॥

दिशः खं कालो भूरुदधिरचलं चाक्षुषमिदं,

विभागो येनायं निखिलमहसा दीपयति तान् ।

स्वयं शुद्धं संविन्निरतिशयमानन्दमजरं,

नमामि श्रीसूर्यं तिमिरहरणं शान्तशरणम् ॥ ४॥

वृषात्पञ्चस्वेत्यौढयति दिनमानन्दगमनस्-,

तथा वृद्धिं रात्रैः प्रकटयति कीटाज्जवगतिः ।

तुले मेषे यातो रचयति समानं दिननिशं,

नमामि श्रीसूर्यं तिमिरहरणं शान्तशरणम् ॥ ५॥

वहन्ते यं ह्यश्वा अरुणविनि युक्ताः प्रमुदितास्-,

त्रयीरूपं साक्षाद्दधति च रथं मुक्तिसदनम् ।

नजीवानां यं वै विषयति मनो वागवसरो,

नमामि श्रीसूर्यं तिमिरहरणं शान्तशरणम् ॥ ६॥

loading...

तथा ब्रह्मा नित्यं मुनिजनयुता यस्य पुरतश्-,

चलन्ते नृत्यन्तोऽयुतमुत रसेनानुगुणितं ।

निबध्नन्ती नागा रथमपि च नागायुतबला ,

नमामि श्रीसूर्यं तिमिरहरणं शान्तशरणम् ॥ ७॥

प्रभाते ब्रह्माणं शिवतनुभृतं मध्यदिवसे,

तथा सायं विष्णुं जगति हितकारी सुखकरम् ।

सदा तेजोराशिं त्रिविवमथ पापौघशमनं,

नमामि श्रीसूर्यं तिमिरहरणं शान्तशरणम् ॥ ८॥

मतं शास्त्राणां यत्तदनु रघुनाथेन रचितं,

शुभं चुंराग्रामे तिमिरहरसूर्याष्टकमिदम् ।

त्रिसन्ध्यायां नित्यं पठति मनुजोऽनन्यगतिमांश्-,

चतुर्वर्गप्राप्तौ प्रभवति सदा तस्य विजयम् ॥ ९॥

नन्देन्द्वङ्क्क्षितावब्दे मार्गमासे शुभे दले ।

सूर्याष्टकमिदं प्रोक्तं दशम्यां रविवासरे ॥ १०॥

इति श्रीपण्डितरघुनाथशर्मणा विरचितं श्रीसूर्याष्टकं सम्पूर्णम् ।

<<< पिछला पेज पढ़ें                                                                                                                      अगला पेज पढ़ें >>>


नोट : यदि आप अपने जीवन में किसी कारण से परेशान चल रहे हो तो ज्योतिषी सलाह लेने के लिए अभी ज्योतिष आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी पर कॉल करके अपनी समस्या का निवारण कीजिये ! +91- 9667189678 ( Paid Services )

यह पोस्ट आपको कैसी लगी Star Rating दे कर हमें जरुर बताये साथ में कमेंट करके अपनी राय जरुर लिखें धन्यवाद : Click Here

Related Post : 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *