श्री सूर्य अष्टकम ( Shri Surya Ashtakam ) Surya Ashtakam

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श्री सूर्य अष्टकम || Shri Surya Ashtakam

यह तो आप सब पहले से जानते हो की हमारे हिन्दू धर्म में सूर्य देव मुख्य देवताओं में से एक है ! सूर्य अष्टकम संस्कृत भाषा में लिखा हुआ हैं ! सूर्य अष्टकम नियमित रूप से पाठ करने से भगवान सूर्य देव का आशीर्वाद बना रहता हैं ! सूर्य अष्टकम का जाप करने से व्यक्ति को यश की प्राप्ति, नकारात्मकता विचार समाप्त हो जाना, रोग, सभी पाप नष्ट हो जाते हैं ! और जातक मुत्यु के बाद सूर्य लोग में जाता हैं !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें : 7821878500 Shri Surya Ashtakam By Acharya Pandit Lalit Trivedi

श्री सूर्य अष्टकम || Shri Surya Ashtakam

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर ।

दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥1॥

सप्ताश्व रथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम् ।

श्वेत पद्माधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥2॥

लोहितं  रथमारूढं  सर्वलोक पितामहम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥3॥

त्रैगुण्यश्च महाशूरं ब्रह्माविष्णु महेश्वरम् ।

महापापहरं  देवं तं  सूर्यं  प्रणमाम्यहम् ॥4॥

बृहितं तेजः  पुञ्ज च वायु आकाशमेव च ।

प्रभुत्वं सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥5॥

बन्धूकपुष्पसङ्काशं हारकुण्डलभूषितम् ।

एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥6॥

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तं सूर्यं लोककर्तारं महा तेजः प्रदीपनम् ।

महापाप हरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥7॥

तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानप्रकाशमोक्षदम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥8॥

सूर्याष्टकं पठेन्नित्यं ग्रहपीडा प्रणाशनम् ।

अपुत्रो लभते पुत्रं दारिद्रो धनवान् भवेत् ॥9॥

अमिषं  मधुपानं च  यः करोति रवेर्दिने ।

सप्तजन्मभवेत् रोगि जन्मजन्म दरिद्रता ॥10॥

स्त्री-तैल-मधु-मांसानि ये त्यजन्ति रवेर्दिने ।

न व्याधि शोक दारिद्र्यं सूर्य लोकं च गच्छति ॥11॥

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