श्री चण्डी पाठ ( Shri Chandi Path ) Chandi Path in Lyrics

श्री चण्डी पाठ, Shri Chandi Path, Shri Chandi Path Ke Fayde, Shri Chandi Path Ke Labh, Shri Chandi Path Benefits, Shri Chandi Path Pdf, Shri Chandi Path in Sanskrit, Shri Chandi Path Lyrics. 

श्री चण्डी पाठ || Shri Chandi Path

श्री चण्डी पाठ के लाभ : Shri Chandi Path Ke Labh : 

कब करें कितनी बार Chandi Path :

शास्त्रों में कहा गया है कि यज्ञों में अश्वमेध यज्ञ व देवताओं में भगवान विष्णु श्रेष्ठ हैं। इस प्रकार स्तुतियों में ‘दुर्गा सप्तशती’ सबसे अधिक व तत्काल फल देने वाली है । नवरात्रों में दुर्गा सप्तशती की पूजा से कई गुणा फल अधिक मिलता है।

  1. पारिवारिक संकट आने पर दुर्गा सप्तशती का तीन बार पाठ करायें या करें।
  2. यदि घर में कोई तकलीफ पा रहा हो तो पांच बार दुर्गा सत्पशती का पाठ करें।
  3. यदि परिवार में कोई भय पैदा करने वाला संकट आया है तो सात बार पाठ करें।
  4. परिवार की सुख समृद्धि के लिये नौ बार पाठ करें।
  5. धनवान बनने के लिये ग्यारह बार पाठ करें।
  6. मनचाही वस्तु पाने के लिये बारह बार पाठ करें।
  7. घर में सुख शांति व श्री वृद्धि के लिये पन्द्रह बार पाठ करें।
  8. पुत्र-पौत्र, धन-धान्य व प्रतिष्ठा के लिये सोलह बार पाठ करें।
  9. यदि परिवार में किसी पर राजदंड, शुत्र का संकट या मुकदमें में फंस गये हो तो अठारह बार पाठ करें।
  10. जेल से छुटकारा पाने के (अगर निदोष हैं) लिये पच्चीस बार पाठ का विधान है।
  11. शरीर में कोई घाव-फोड़ा आदि हो गया हो या आपरेशन कराने की नौबत आ गयी हो तो तीस बार पाठ कराने से फायदा होता है।
  12. भयंकर संकट, असाध्य रोग, वंशनाश या धन नाश की नौबत आये तो सौ बार सत्पशती का पाठ करायें। सौ बार पाठ को ही शतचण्डी पाठ कहते हैं।
  13. एक हजार पाठ कराने वाले यजमान को मुक्ति मिल जाती है। इसे ही सहस्त्रचण्डी पूजा कहते हैं।

हमारे Youtube चैनल को अभी SUBSCRIBES करें ||

मांगलिक दोष निवारण || Mangal Dosha Nivaran

दी गई YouTube Video पर क्लिक करके मांगलिक दोष के उपाय || Manglik Dosh Ke Upay बहुत आसन तरीके से सुन ओर देख सकोगें !

सप्तशती के छह अंग मुख्य है-

  • कवच
  • अर्गला
  • कीलक
  • प्रधाणिक
  • वैकृतिक रहस्य
  • मूर्त्त रहस्य

इनके बिना Chandi Path पूरा नहीं होता है। इसका फल यजमान को भुगतना पड़ता है। आदि व अंत में नर्वाण मंत्र का जाप 108 बार करना चाहिए। बीच में Chandi Path करें। देव्यथर्वशीर्ष, कुंजिकास्तोत्र व क्षमा याचना स्तोत्र का पाठ करने से चण्डी पाठ पूर्ण होता है। भगवान शिव कहते हैं। कि पहले अर्गला, कीलक व बाद में कवच पाठ करना चाहिए। इसके बाद ही Chandi Path करना चाहिये। 

  • अर्गला से पाप का नाश होता है।
  • कीलक से मनचाहा फल मिलता है।
  • कवच शरीर की रक्षा है।

कुछ विद्वान चंडीपाठ, के बाद, बीच में व पहले ‘बटुक भैरव स्तोत्र’ का पाठ भी करते हैं। इससे बड़े से बड़ा संकट दूर होता है। तथा सारी मनोकामनायें पूर्ण होती है। !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें : 7821878500 Shri Chandi Path By Acharya Pandit Lalit Trivedi

श्री चण्डी पाठ || Shri Chandi Path

॥ श्रीचण्डीपाठः ॥

॥ ॐ श्री देवैः नमः ॥

॥ अथ चंडीपाठः ॥

या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता ।

नमस्तस्यै १४ नमस्तस्यै १५ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-१६॥

या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते ।

नमस्तस्यै १७ नमस्तस्यै १८ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-१९॥

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै २० नमस्तस्यै २१ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-२२॥

या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै २३ नमस्तस्यै २४ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-२५॥

या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै २६ नमस्तस्यै २७ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-२८॥

या देवी सर्वभूतेषु च्छायारूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै २९ नमस्तस्यै ३० नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-३१॥

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै ३२ नमस्तस्यै ३३ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-३४॥

या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै ३५ नमस्तस्यै ३६ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-३७॥

या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै ३८ नमस्तस्यै ३९ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-४०॥

या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै ४१ नमस्तस्यै ४२ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-४३॥

या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै ४४ नमस्तस्यै ४५ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-४६॥

या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै ४७ नमस्तस्यै ४८ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-४९॥

या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै ५० नमस्तस्यै ५१ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-५२॥

या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै ५३ नमस्तस्यै ५४ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-५५॥

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै ५६ नमस्तस्यै ५७ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-५८॥

या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै ५९ नमस्तस्यै ६० नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-६१॥

या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै ६२ नमस्तस्यै ६३ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-६४॥

हमारे Youtube चैनल को अभी SUBSCRIBES करें ||

मांगलिक दोष निवारण || Mangal Dosha Nivaran

दी गई YouTube Video पर क्लिक करके मांगलिक दोष के उपाय || Manglik Dosh Ke Upay बहुत आसन तरीके से सुन ओर देख सकोगें !

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै ६५ नमस्तस्यै ६६ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-६७॥

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै ६८ नमस्तस्यै ६९ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-७०॥

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै ७१ नमस्तस्यै ७२ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-७३॥

या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै ७४ नमस्तस्यै ७५ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-७६॥

इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भुतानाञ्चाखिलेषु या ।

भूतेषु सततं तस्यै व्याप्तिदेव्यै नमो नमः ॥ ५-७७॥

चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद् व्याप्य स्थिता जगत् ।

नमस्तस्यै ७८ नमस्तस्यै ७९ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-८०॥

॥ इति चंडीपाठः ॥

<<< पिछला पेज पढ़ें                                                                                                                      अगला पेज पढ़ें >>>


नोट : ज्योतिष सम्बन्धित व् वास्तु सम्बन्धित समस्या से परेशान हो तो ज्योतिष आचार्य पंडित ललित त्रिवेदी पर कॉल करके अपनी समस्या का निवारण कीजिये ! +91- 7821878500 ( Paid Services )

Related Post :

नवरात्रि के उपाय || Navratri Ke Upay

नवरात्रि में 9 दिन के 9 उपाय || Navratri Me 9 Din Ke 9 Upay

राशि अनुसार नवरात्रि के उपाय || Rashi Anusar Navratri Ke Upay

माँ दुर्गा देवी मंत्र || Maa Durga Devi Mantra

श्री दुर्गा स्तुति || Shri Durga Stuti

श्री दुर्गादेवी ध्यानम् || Shri Durga Devi Dhyanam

श्री दुर्गा द्वात्रिंश नाम माला स्तोत्र || Shri Durga Dwatrinsha Naamamala Stotra

देवी अपराध क्षमा स्तोत्र || Devi Aparadha Kshama Stotram

देवी क्षमा प्रार्थना स्तोत्र || Devi Kshama Prarthana Stotram

आपदुन्मूलनदुर्गास्तोत्रम् || Apadunmoolana Durga Stotram

शिव कृतं दुर्गा स्तोत्र || Shiv Krit Durga Stotra

परशुराम कृतं दुर्गा स्तोत्र || Parshuram Krit Durga Stotra

श्री कृष्ण कृतं दुर्गा स्तोत्रम् || Sri Krishna Krit Durga Stotram

देवी कवच || Devi Kavacham

श्री दुर्गा कवचम् || Shri Durga Kavacham

ब्रह्माण्ड मोहनाख्यं दुर्गा कवचम् || Brahmanda Mohanakhyam Durga Kavacham

ऋग्वेदोक्त देवी सूक्तम् || Rigvedoktam Devi Suktam

श्री दुर्गा अष्टकम् || Shri Durga Ashtakam

श्री दुर्गाष्टकम् || Shri Durgashtakam

श्री दुर्गा आपदुद्धाराष्टकम् || Sri Durga Apaduddharaka Ashtakam

आर्या दुर्गा अष्टकम् || Arya Durga Ashtakam

श्री दुर्गा पञ्चरत्नम् || Shri Durga Pancharatnam

श्री दुर्गा मानस पूजा || Shri Durga Manasa Puja

श्री दुर्गा सहस्त्रनाम स्तोत्रम् || Shri Durga Sahasranama Stotram

माँ दुर्गा के 108 नाम || Maa Durga Ke 108 Naam

दुर्गा माँ अष्टोत्तर शतनामावली || Durga Maa Ashtottara Shatanamavali

दुर्गा देवी अष्टोत्तर शतनामावली || Shri Durga Devi Ashtottara Shatanamavali

श्री दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् || Shri Durga Ashtottara Shatanama Stotram

दुर्गा सप्तशती सिद्ध मंत्र || Durga Saptashati Siddha Mantra

श्री दुर्गा चालीसा || Shri Durga Chalisa

श्री दुर्गा माता की आरती || Shri Durga Mata Ki Aarti

अम्बे तू है जगदम्बे काली आरती || Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Aarti

नवार्ण मंत्र साधना विधि || Navarna Mantra Sadhana Vidhi

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र || Siddha Kunjika Stotram

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र साधना || Siddha Kunjika Stotram Sadhana

दस महाविद्या साधना विधि || Dus Mahavidya Sadhana Vidhi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *