श्री भुवनेश्वरी पञ्चकम् ( Shri Bhuvaneshvari Panchakam ) Bhuvaneshvari Panchakam

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श्री भुवनेश्वरी पञ्चकम् || Shri Bhuvaneshvari Panchakam

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श्री भुवनेश्वरी पञ्चकम् || Shri Bhuvaneshvari Panchakam

॥ श्रीभुवनेश्वरी पञ्चकं अथवा प्रातःस्मरणम् ॥

प्रातः स्मरामि भुवना-सुविशालभालं,

माणिक्य-मोउलि-लसितं सुसुधांशु-खण्दम् ।

मन्दस्मितं सुमधुरं करुणाकटाक्षं,

ताम्बूलपूरितमुखं श्रुति-कुन्दले च ॥ १॥

प्रातः स्मरामि भुवना-गलशोभि मालां,

वक्षःश्रियं ललिततुङ्ग-पयोधरालीम् ।

संवित् घटञ्च दधतीं कमलं कराभ्यां,

कञ्जासनां भगवतीं भुवनेश्वरीं ताम् ॥ २॥

प्रातः स्मरामि भुवना-पदपारिजातं,

रत्नोउघनिर्मित-घटे घटितास्पदञ्च ।

योगञ्च भोगममितं निजसेवकेभ्यो,

वाञ्चाऽधिकं किलददानमनन्तपारम् ॥ ३॥

प्रातः स्तुवे भुवनपालनकेलिलोलां,

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ब्रह्मेन्द्रदेवगण-वन्दित-पादपीठम् ।

बालार्कबिम्बसम-शोणित-शोभिताङ्गीं,

विन्द्वात्मिकां कलितकामकलाविलासाम् ॥ ४॥

प्रातर्भजामि भुवने तव नाम रूपं,

भक्तार्तिनाशनपरं परमामृतञ्च ।

ह्रीङ्कारमन्त्र-मननी जननी भवानी,

भद्रा विभा भयहरी भुवनेश्वरीति ॥ ५॥

यः श्लोकपञ्चकमिदं स्मरति प्रभाते,

भूतिप्रदं भयहरं भुवनाम्बिकायाः ।

तस्मै ददाति भुवना सुतरां प्रसन्ना,

सिद्धं मनोः स्वपदपद्म-समाश्रयञ्च ॥

इति श्रीदत्तात्रेयानन्दनाथ-विरचितं श्रीभुवनेश्वरी-पञ्चकम् एवम् श्रीभुवनेश्वरी प्रातःस्मरणम् सम्पूर्णम् ।

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