शरद पूर्णिमा की पूजा विधि || Sharad Purnima Puja Vidhi

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शरद पूर्णिमा की पूजा विधि || Sharad Purnima Puja Vidhi

आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं ! हम आपको यंहा राशि अनुसार शरद पूर्णिमा उपाय बताने जा रहे है जिन्हें आप शरद पूर्णिमा वाले दिन करके लाभ उठा सकोगें ! यह तो आप सब जानते भी हो की शरद पूर्णिमा को “कोजागर पूर्णिमा” भी कहते है शरद पूर्णिमा की रात दीवाली से भी ज्यादा अहम मानी है, क्योंकि इस रात स्वयं मां लक्ष्मी अपने भक्तों को संपत्ति देने के लिये खोजती हैं ! शरद पूर्णिमा का शास्त्रों में बहुत महत्व बताया गया है रात्रि के उस पहर का जिसमें 16 कलाओं से युक्त चंद्रमा अमृत की वर्षा धरती पर करता है। वर्षा ऋतु की जरावस्था और शरद ऋतु के बाल रूप का यह सुंदर संजोग हर किसी का मन मोह लेता है। शरद पूर्णिमा से हेमंत ऋतु की शुरुआत होती है ! Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Trivedi द्वारा बताये जा रहे शरद पूर्णिमा की पूजा विधि || Sharad Purnima Puja Vidhi के अनुसार आप यह जान सकोगे की शरद पूर्णिमा कैसे बनाये इस दिन कैसे पूजन करें !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 7821878500 Sharad Purnima Puja Vidhi By Acharya Pandit Lalit Trivedi

शरद पूर्णिमा की पूजा विधि || Sharad Purnima Puja Vidhi

  • Sharad Purnima Puja करने वाले दिन जातक को प्रात: काल ब्रह्ममुहूर्त ( सूर्योदय से पहले ) में जगे !
  • इसके पश्चात अपने नित्यकर्म से निवृत्त होकर स्नान आदि कार्य करें !
  • स्वयं स्वच्छ व् साफ सुधारे वस्त्र धारण कर अपने आराध्य देव ( इष्ट देव ) को स्नान कराकर उन्हें सुंदर वस्त्राभूषणों से सुशोभित करें ! और उनके आसन को साफ करके उन्हें आसन दें !

  • अब उसके बाद अपने इष्ट व् आराध्य देव को आचमन, वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, सुपारी, दक्षिणा आदि से पूजन करें !
  • पूजन करने के बाद गोदुग्ध से बनी खीर में घी तथा शक्कर मिलाकर पुरिया सहित चंद्रमा उदय होने के बाद भगवान का भोग लगाएं !
  • तिलक करने के बाद गेहूं के 13 दाने हाथ में ले कर Sharad Purnima Puja व्रत कथा सुनें । इसके लिए एक लोटे में जल तथा गिलास में गेहूं, पत्ते के दोने में रोली तथा चावल रखकर कलश की वंदना करके दक्षिणा चढ़ाएं !

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  • अंत में लोटे के जल से रात में चंद्रमा को अर्घ्य दें ! 
  • स‍‍भी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित करें और रात्रि जागरण कर भगवद् भजन करें !
  • चांद की रोशनी में सुई में धागा अवश्य पिरोएं ! एसा करने से नेत्र की ज्योति तेज़ होती है !

  • निरोग रहने के लिए पूर्ण चंद्रमा जब आकाश के मध्य में स्थित हो, तब उसका पूजन करें !
  • रात को ही खीर से भरी थाली खुली चांदनी में रख दें !
  • दूसरे दिन सबको उसका प्रसाद दें तथा स्वयं भी ग्रहण करें !

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