माता कुष्मांडा देवी की पूजा विधि || Mata Kushmanda Devi Ki Puja Vidhi

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माता कुष्मांडा देवी की पूजा विधि || Mata Kushmanda Devi Ki Puja Vidhi

नवरात्रि के चौथे दिन माता कूष्मांडा की पूजा अर्चना की जाती है | यह देवी अपनी मंद हंसी से ब्रह्माण्ड का निर्माण करने वाली “माँ कूष्मांडा” देवी दुर्गा का चौथा स्वरुप हैं । !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 7821878500 Mata Kushmanda Devi Ki Puja Vidhi By Acharya Pandit Lalit Trivedi

माता कुष्मांडा देवी की पूजा विधि || Mata Kushmanda Devi Ki Puja Vidhi

माता कुष्मांडा देवी का स्वरूप || Mata Kushmanda Devi Ka Swarup

अपने उदर से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण मां दुर्गा के इस स्वरुप को कूष्मांडा के नाम से पुकारा जाता है | मान्यतानुसार सिंह पर सवार माँ कूष्मांडा सूर्यलोक में वास करती हैं, जो क्षमता किसी अन्य देवी देवता में नहीं है। माँ कूष्मांडा अष्टभुजा धारी हैं और अस्त्र- शस्त्र के साथ माँ के एक हाथ में अमृत कलश भी है। अपने दैवीय स्वरुप में मां कूष्मांडा बाघ पर सवार हैं ! 

माता कुष्मांडा देवी की पूजा विधि || Mata Kushmanda Devi Ki Puja Vidhi

नवरात्रि के चौथे दिन भगवती माँ कूष्मांडा के पूजन से भक्त को अनाहत चक्र जाग्रति की सिद्धियां प्राप्त होती है | इनके मस्तक पर रत्नजड़ित मुकुट है और अष्टभुजाधारी होने के कारण इनके हाथों में कमल, सुदर्शन, चक्र, गदा, धनुष-बाण, अक्षय माला, कमंडल और कलश सुशोभित हैं |

माँ कूष्मांडा की अराधना से श्रद्धालु रोग, शोक और विनाश से मुक्त होकर आयु, यश, बल और बुद्धि को प्राप्त करते  है | श्रद्धावान भक्तों में मान्यता है कि यदि कोई सच्चे मन से माता के शरण को ग्रहण करता है तो मां कूष्मांडा उसे सभी प्रकार की व्याधियों से विमुक्त करके सुख, समृद्धि और उन्नति की ओर ले जाती है |

मान्यतानुसार नवरात्र के चौथे दिन Mata Kushmanda के पूजन के बाद भक्तों को तेजस्वी महिलाओं को बुलाकर उन्हें भोजन कराना चाहिए और भेंट स्वरुप फल और सौभाग्य के सामान देना चाहिए | इससे माता भक्त पर प्रसन्न रहती है और हर समय उसकी सहायता करती है | चतुर्थी के दिन मालपुए का नैवेद्य अर्पित किया जाए और फिर उसे योग्य ब्राह्मण को दे दिया जाए। इस अपूर्व दान से हर प्रकार का विघ्न दूर हो जाता है। मान्यता है कि माता की उपासना से मनुष्य को व्याधियों से मुक्ति मिलती है। मनुष्य अपने जीवन के परेशानियों से दूर होकर सुख और समृद्धि की तरफ बढ़ता है । 

माता कुष्मांडा देवी का मंत्र || Mata Kushmanda Devi Ka Mantra

सूरा सम्पूर्ण कलशं रुधिरा प्लुतमेव च | दधानां हस्त पदमयां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ||

माता कुष्मांडा देवी के उपाय || Mata Kushmanda Devi Ke Upay

चतुर्थी तिथि को Mata Kushmanda देवी को माल पूआ का भोग लगाने से और दान करने से सभी प्रकार की समस्याएं अपने आप ही समाप्त हो जाती हैं । 

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