माता कात्यायनी देवी की पूजा विधि || Mata Katyayani Devi Ki Puja Vidhi

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माता कात्यायनी देवी की पूजा विधि || Mata Katyayani Devi Ki Puja Vidhi

नवरात्री के छठे दिन आदिशक्ति मां दुर्गा की षष्ठम रूप और असुरों तथा दुष्टों का नाश करने वाली भगवती कात्यायनी की पूजा की जाती है | कात्यायनी देवी दुर्गा जी का छठा अवतार हैं । !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 7821878500 Mata Katyayani Devi Ki Puja Vidhi By Acharya Pandit Lalit Trivedi

माता कात्यायनी देवी की पूजा विधि || Mata Katyayani Devi Ki Puja Vidhi

माता कात्यायनी देवी की कथा || Mata Katyayani Devi Ki Puja Vidhi Ki Katha

शास्त्रों के अनुसार देवी ने कात्यायन ऋषि के घर उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया, इस कारण इनका नाम कात्यायनी पड़ गया। मार्कण्डये पुराण के अनुसार जब राक्षसराज महिषासुर का अत्याचार बढ़ गया, तब देवताओं के कार्य को सिद्ध करने के लिए देवी मां ने महर्षि कात्यान के तपस्या से प्रसन्न होकर उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया | 

माता कात्यायनी देवी का स्वरूप || Mata Katyayani Devi Ki Puja Vidhi Ka Swarup

दिव्य रुपा कात्यायनी देवी का शरीर सोने के समाना चमकीला है। चार भुजा धारी माँ कात्यायनी सिंह पर सवार हैं। अपने एक हाथ में तलवार और दूसरे में अपना प्रिय पुष्प कमल लिये हुए हैं। अन्य दो हाथ वरमुद्रा और अभयमुद्रा में हैं। इनका वाहन सिंह हैं। देवी कात्यायनी के नाम और जन्म से जुड़ी एक कथा प्रसिद्ध है। एक कथा के अनुसार एक वन में कत नाम के एक महर्षि थे उनका एक पुत्र था जिसका नाम कात्य रखा गया।

इसके पश्चात कात्य गोत्र में महर्षि कात्यायन ने जन्म लिया। उनकी कोई संतान नहीं थी। मां भगवती को पुत्री के रूप में पाने की इच्छा रखते हुए उन्होंने पराम्बा की कठोर तपस्या की। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें पुत्री का वरदान दिया। कुछ समय बीतने के बाद राक्षस महिषासुर का अत्याचार अत्यधिक बढ़ गया। तब त्रिदेवों के तेज से एक कन्या ने जन्म लिया और उसका वध कर दिया। कात्य गोत्र में जन्म लेने के कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ गया।

माता कात्यायनी देवी की पूजा विधि || Mata Katyayani Devi Ki Puja Vidhi

मान्यता है कि यदि कोई श्रद्धा भाव से नवरात्री के छठे दिन Mata Katyayani की पूजा आराधना करता है तो उसे आज्ञा चक्र की प्राप्ति होती है | वह भूलोक में रहते हुए भी अलौकिक तेज़ से युक्त होता है और उसके सारे रोग, शोक, संताप, भय हमेशा के लिए विनष्ट हो जाते हैं | मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण को पति रूप में प्राप्त करने के लिए रुक्मिणी ने इनकी ही आराधना की थी, जिस कारण मां कात्यायनी को मन की शक्ति कहा गया है | षष्ठी तिथि के दिन देवी के पूजन में मधु का महत्व बताया गया है। इस दिन प्रसाद में मधु यानि शहद का प्रयोग करना चाहिए। Mata Katyayani अमोघ फलदायिनी मानी गई हैं। शिक्षा प्राप्ति के क्षेत्र में प्रयासरत भक्तों को माता की अवश्य उपासना करनी चाहिए। इसके प्रभाव से साधक सुंदर रूप प्राप्त करता है। 

माता कात्यायनी देवी का मंत्र || Mata Katyayani Devi Ka Mantra

चंद्र हासोज्ज वलकरा शार्दू लवर वाहना | कात्यायनी शुभं दद्या देवी दानव घातिनि || 

माता कात्यायनी देवी के उपाय || Mata Katyayani Devi Ke Upay

नवरात्र के छठे दिन Mata Katyayani देवी को शहद का भोग लगाने और दान करने से आपके यंहा धन आगमन के योग बनते हैं ! 

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