माता चंद्रघंटा देवी की पूजा विधि || Mata Chandraghanta Devi Ki Puja Vidhi

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माता चंद्रघंटा देवी की पूजा विधि || Mata Chandraghanta Devi Ki Puja Vidhi

श्री दुर्गा जी का तीसरा अवतार चंद्रघंटा हैं। इन देवी माँ के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र होने के कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां दुर्गा की  शक्तियों की तीसरी स्वरूपा भगवती चंद्रघंटा की पूजा नवरात्र के तीसरे दिन की जाती है | !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 7821878500 Mata Chandraghanta Devi Ki Puja Vidhi By Acharya Pandit Lalit Trivedi

माता चंद्रघंटा देवी की पूजा विधि || Mata Chandraghanta Devi Ki Puja Vidhi

माता चंद्रघंटा देवी का स्वरूप || Mata Chandraghanta Devi Ka Swarup

अपने मस्तक पर घंटे के आकार के अर्धचन्द्र को धारण करने के कारण माँ “चंद्रघंटा” नाम से पुकारा जाता है ! इनका वाहन सिंह है इस पर देवी माँ स्वर होकर दुष्टों का नाश करने के लिए तत्पर रहती है चंद्रघंटा देवी को स्वर की देवी भी कहा जाता है । 

इनका रूप परम पावन एवं शांतिदायक और कल्याणकारी है | माता का शरीर स्वर्ण के समान उज्जवल है | इनका वाहन सिंह है और इनके दस हाथ हैं जिनमें इन्होंने शंख, कमल, धनुष-बाण, तलवार, कमंडल, त्रिशूल, गदा आदि शस्त्र धारण कर रखे हैं। इनके माथे पर स्वर्णिम घंटे के आकार का चांद बना हुआ है और इनके गले में सफेद फूलों की माला है। सिंह पर सवार मां चंद्रघंटा का रूप युद्ध के लिए उद्धत दिखता है और उनके घंटे की प्रचंड ध्वनि से असुर और राक्षस भयभीत रहते हैं |

माता चंद्रघंटा देवी की कथा || Mata Chandraghanta Devi Ki Katha

भगवती चंद्रघंटा की उपासना करने से उपासक आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्राप्त करते है | और जो श्रद्धालु इस दिन श्रद्धा एवं भक्ति पूर्वक दुर्गा सप्तसती का पाठ करता है, वह संसार में यश, कीर्ति एवं सम्मान को प्राप्त करता है. माता चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना भक्तो को सभी जन्मों के कष्टों और पापों से मुक्त कर इसलोक और परलोक में कल्याण तथा मोक्ष  प्रदान करती है और भगवती अपने दोनों हाथो से साधकों को चिरायु, सुख सम्पदा और रोगों से मुक्त होने का वरदान देती हैं |

मनुष्य को निरंतर माता चंद्रघंटा के पवित्र विग्रह को ध्यान में रखते हुए साधना की ओर अग्रसर होने का प्रयास करना चाहिए और इस दिन महिलाओं को घर पर बुलाकर आदर सम्मान पूर्वक उन्हें भोजन कराना चाहिए और कलश या मंदिर की घंटी उन्हें भेंट स्वरुप प्रदान करना चाहिए | इससे भक्त पर सदा भगवती की कृपा दृष्टि बनी रहती है | तृतीया के दिन भगवती की पूजा में दूध की प्रधानता होनी चाहिए और पूजन के उपरांत वह दूध ब्राह्मण को देना उचित माना जाता है। इस दिन सिंदूर लगाने का भी रिवाज है। इनकी उपासना से मनुष्य समस्त सांसारिक कष्टों से मुक्ति पाता है । 

माता चंद्रघंटा देवी का मंत्र || Mata Chandraghanta Devi Ka Mantra

पिण्डज प्रवरारुढ़ा चण्डकोपास्त्र कैर्युता | प्रसादं तनुते मह्यं चंद्र घंष्टेति विश्रुता ||

माता चंद्रघंटा देवी के उपाय || Mata Chandraghanta Devi Ke Upay

तृतीया तिथि को Mata Chandraghanta को दूध चढ़ाने और भोग लगाकर दान करने से सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है । 

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