माँ छिन्नमस्ता देवी मंत्र ( Maa Chhinnamasta Devi Mantra ) Chhinnamasta Mantra

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माँ छिन्नमस्ता देवी मंत्र || Maa Chhinnamasta Devi Mantra

आज हम आपको छिन्नमस्ता साधना विधि के बारे में बताने जा रहे हैं ! यह तो आप सब जानते है की दस महाविद्याओं में पांचवे स्थान पर छिन्नमस्ता साधना मानी जाती हैं ! महाविद्या छिन्नमस्ता साधना विधि के बारे में हम पहले ही जानकारी दे चुके हैं !इस साधना को आप चैत्र व् आश्विन नवरात्रि में या गुप्त नवरात्रि में कर सकते है ! देवी छिन्नमस्ता मंत्र साधना नवरात्री का पंचम दिन सौम्य रूप श्री स्कंदमाता देवी उग्र रूप श्री विद्या में माँ छिन्नमस्तिका देवी स्वयं अपनी या स्वतः बलिदान देने वाली देवी छिन्नमस्ता, दस महाविद्याओं में पांचवें स्थान पर, बुद्धि और ज्ञान से संबंधित । यौन वासनाओं तथा अत्यधिक कामनाओं के त्याग और आत्म नियंत्रण की साक्षात छवि हैं ‘देवी छिन्नमस्ता’। देवी छिन्नमस्ता का घनिष्ठ सम्बन्ध, “कुंडलिनी” नामक प्राकृतिक ऊर्जा या मानव शरीर में छिपी हुई प्राकृतिक शक्ति से हैं। देवी छिन्नमस्ता की आराधना जैन तथा बौद्ध धर्म में भी की जाती हैं तथा बौद्ध धर्म में देवी छिन्नमुण्डा वज्रवराही के नाम से विख्यात हैं !! Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Trivedi द्वारा बताये जा रहे माँ छिन्नमस्ता देवी मंत्र || Maa Chhinnamasta Devi Mantra को जानकर आप भी महाविद्या छिन्नमस्ता साधना पूरी कर सकते हैं !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 7821878500 Maa Chhinnamasta Devi Mantra By Acharya Pandit Lalit Trivedi 

माँ छिन्नमस्ता देवी मंत्र || Maa Chhinnamasta Devi Mantra

मुख्य नाम : छिन्नमस्ता ।

अन्य नाम : छिन्न-मुंडा, छिन्न-मुंडधरा, आरक्ता, रक्त-नयना, रक्त-पान-परायणा, वज्रवराही।

भैरव : क्रोध-भैरव।

भगवान विष्णु के २४ अवतारों से सम्बद्ध : भगवान नृसिंह अवतार।

तिथि : वैशाख शुक्ल चतुर्दशी।

कुल : काली कुल।

दिशा : उत्तर।

स्वभाव : उग्र, तामसी गुण सम्पन्न।

कार्य : सभी प्रकार के कार्य हेतु दृढ़ निश्चितता, फिर वह अपना मस्तक ही अपने हाथों से क्यों न काटना हो, अहंकार तथा समस्त प्रकार के अवगुणों का छेदन करने हेतु शक्ति प्रदाता, कुण्डलिनी जाग्रति में सहायक।

शारीरिक वर्ण : करोड़ों उदित सूर्य के प्रकाश समान कान्तिमयी।

माँ छिन्नमस्ता नवग्रह दोष निवारण मंत्र : Navgrah Dosh Nivaran Chhinnamasta Devi Mantra :

llॐ श्रीं ह्रीं ऐं क्लीं वं वज्रवैरोचिनिये हुम ll

श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीये हूं हूं फट् स्वाहा। 

यह मंत्र मे 18 शक्तियो से युक्त है और इस मंत्र की विशेषता निन्म है: 

श्रीं- यह लक्ष्मी का प्रतीक है। 

ह्रीं- यह जीवन में सभी दृष्टियों से उन्नति में सहायक है। 

क्लीं- यह मनोभाव बीज है, जो कि समस्त पापों को नष्ट कर देता है। 

ऐं- जीवन में समस्त गुणों एवं संजीवनी विद्या प्रदान करने वाला है। 

व- ये वरुण देव का प्रतीक माना जाता है, जिससे शरीर नियंत्रित रहता है।

ज- यह इंद्र का प्रतीक माना गया है, जो कि एक स्थान पर दूरस्थ है। किसी को जानने में सहायक है। 

र- यह अग्नि देव का प्रतीक है और ऊर्जा का संचार करता है। 

व- यह पृथ्वीपति बीज है, जिससे भूमि-सिद्धि अर्थात् प्रॉपर्टी दिलाने में सहायक होता है। 

ऐ- यह त्रिपुर देवी का प्रतीक है। 

र- यह त्रिपुर सुंदरी का बीजाक्षर है। 

ओ- सदैव त्रैलोक्य विजय देवी का आत्मीरूप का प्रतीक है। 

च- यह बीज चंद्रमा का प्रतीक माना गया है, जो मानसिक शीतलता प्रदान करता है। 

न- यह बीजाक्षर गणेश जी का प्रतीक माना गया है, जो कार्यों को पूर्ण करने में सहायक होता है। 

ई- यह साक्षात कमला का बीजाक्षर है। 

य- इससे साधक को ज्ञान प्राप्त होता है। 

हूं- यह माया युग्म बीज है, जो आत्मा व प्रकृति का संगम है। 

फट्- यह साधक को मनोवांछित कार्यों को संपन्न करने में सहायक होता है। 

स्वा- यह कामदेव का बीज है, जिससे साधक का शरीर सुंदर बनता है। 

हा- यह रति का बीज है, जो पौरुष बल प्रदान करने में सहायक होता है।

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माँ छिन्नमस्ता देवी मन्त्र : Maa Chhinnamasta Devi Mantra :

।। श्रीं ह्रीं क्लीं ऐ वज्र वैरोचनीये हुं हुं फट् स्वाहा ।।

माँ छिन्नमस्ता वशीकरण मन्त्र :  Vashikaran Chhinnamasta Devi Mantra : 

“हुं” या “हुं स्वाहा” या “क्लीं श्रीं ह्रीं ऐं वज्र वैरोचनीये ह्रीं ह्रीं फट स्वाहा”

माँ छिन्नमस्ता धर्म अर्थ काम मोक्ष प्राप्ति मन्त्र : Moksh Prapti Chhinnamasta Devi Mantra :

“ॐ हुं स्वाहा ॐ”

पापो से मुक्ति दिलवाने का मंत्र : Paap Mukti Chhinnamasta Devi Mantra :

“हूं श्री ह्री ऐं वज्र वैरोचनीये हूं हूं फट स्वाहा”

वाक शक्ति का मंत्र : Vaak Shakti Chhinnamasta Devi Mantra :

“श्रीं ह्रीं हूं ऐं वज्रवैरोचनीये श्रीं ह्रीं हूं ऐं स्वाहा”

ऐश्वर्य और समोहन शक्ति देने का मंत्र : Sammohan Chhinnamasta Devi Mantra :

“ह्रीं हूं ऐं वज्र वैरोचनीये हुं फट स्वाहा” 

नोट : महाविद्या Chhinnamasta Devi Mantra साधना विधि आप बिना गुरु बनाये ना करें गुरु बनाकर व् अपने गुरु से सलाह लेकर इस साधना को करना चाहिए ! क्युकी बिना गुरु के की हुई साधना आपके जीवन में हानि ला सकती है ! 

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