कब करें पितृ श्राद्ध ( Kab Kare Pitru Shraddha ) Pitru Shraddha Tithi

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कब करें पितृ श्राद्ध || Kab Kare Pitru Shraddha || Pitru Shraddha Tithi

आप सब को मालूम होगा की श्राद्ध पक्ष का प्रारंभ 25 सितंबर, 2018 ( पूर्णिमा, मंगलवार ) से शुरू हो रहे है, जिसका समापन 09  अक्टूबर, ( अमावस्या, मंगलवार ) को पूर्ण होगा ! श्राद्धों का पितरों के साथ अटूट संबंध है ! जिस ‘मृत व्यक्ति’ के एक वर्ष तक के सभी और्ध्व दैहिक क्रिया कर्म संपन्न हो जायें, उसी की ‘पितर’ संज्ञा हो जाती है! जिस तिथि को अपने सगे-संबंधी की मृत्यु होती है, उसी दिन उनके निमित्त श्राद्ध करना चाहिए ! और जिस व्यक्ति की तिथि याद ना रहे तब उस अवस्था में अमावस्या के दिन उसका श्राद्ध करने का विधान होता है Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Sharma द्वारा बताये जा रहे कब करें पितृ श्राद्ध || Kab Kare Pitru Shraddha को  पढ़कर आप भी अपने पितृ को ख़ुश कर सकते है !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 7821878500 Kab Kare Pitru Shraddha By Acharya Pandit Lalit Sharma

पितृ श्राद्ध तिथि || Pitru Shraddha Tithi

जिन जातक के जन्म पत्रिका में पितृ दोष उन जातक को विधि विधान से अपने Pitru Shraddha करने से पितृ दोष से मुक्ति होती है ! साधारणत: पुत्र ही अपने पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं ! किन्तु शास्त्रानुसार ऐसा हर व्यक्ति जिसने मृतक की सम्पत्ति विरासत में पायी है और उससे प्रेम और आदर भाव रखता है, उस व्यक्ति का स्नेहवश श्राद्ध कर सकता है। विद्या की विरासत से भी लाभ पाने वाला छात्र भी अपने दिवंगत गुरु का श्राद्ध कर सकता है ! पुत्र की अनुपस्थिति में पौत्र या प्रपौत्र भी श्राद्ध-कर्म कर सकता है ! 

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पितृ श्राद्ध तिथि २०१८ : Pitru Shraddha Tithi 2018

  • दिनांक : 25  सितम्बर – पूर्णिमा
  • दिनांक : 26  सितम्बर – प्रतिपदा श्राद्ध
  • दिनांक : 27 सितम्बर –  द्वितिय श्राद्ध
  • दिनांक : 28 सितम्बर – तृतीय श्राद्ध
  • दिनांक : 29  सितम्बर – चतुर्थ श्राद्ध
  • दिनांक : 30  सितम्बर – पंचमी श्राद्ध / षष्ठी श्राद्ध
  • दिनांक : 01 अक्टूबर – सप्तमी श्राद्ध
  • दिनांक : 02  अक्टूबर – अष्टमी श्राद्ध
  • दिनांक : 03  सितम्बर – नवमी श्राद्ध
  • दिनांक : 04  अक्टूबर – दशमी श्राद्ध
  • दिनांक : 05  अक्टूबर – एकादशी श्राद्ध
  • दिनांक : 06  अक्टूबर –  द्वादशी श्राद्ध
  • दिनांक : 07  अक्टूबर – त्रयोदशी श्राद्ध
  • दिनांक : 08  अक्टूबर – चतुर्दशी श्राद्ध, अमावस श्राद्ध , पितृकार्येषु
  • दिनांक : 09  अक्टूबर – आश्विन अमावस स्नान , देवकार्यषु

कब करें पितृ श्राद्ध || Kab Kare Pitru Shraddha

जिन लोगों को अपने परिजनों की मृत्यु की तिथि का पता नही है उसके लिए भी श्राद्ध-पक्ष में कुछ विशेष तिथियाँ निर्धारित की गई हैं ! उन तिथियों पर वे लोग पितरों के निमित श्राद्ध कर सकते है ! और अपने पितृ को खुश कर सकते है !

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  • प्रतिपदा : आश्विन शुक्ल की प्रतिपदा को नाना-नानी / दादी के Pitru Shraddha करना सही बताया गया है ! इस तिथि को श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है ! यदि नाना-नानी के परिवार में कोई श्राद्ध करने वाला न हो और उनकी मृत्युतिथि याद न हो, तो आप इस दिन उनका श्राद्ध कर सकते हैं !
  • पंचमी : जिन लोगों की मृत्यु अविवाहित स्थिति में हुई हो, उनका Pitru Shraddha इस तिथि को किया जाना चाहिये ।
  • नवमी : सौभाग्यवती यानि पति के रहते ही जिनकी मृत्यु हो गई हो, उन स्त्रियों का नवमी को Pitru Shraddha किया जाता है । यह तिथि माता के श्राद्ध के लिए भी उत्तम मानी गई है । इसलिए इसे मातृ-नवमी भी कहते हैं । मान्यता है कि – इस तिथि पर श्राद्ध कर्म करने से कुल की सभी दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध हो जाता है !
  • एकादशी और द्वादशी : एकादशी में वैष्णव संन्यासी का Pitru Shraddha करते हैं । अर्थात् इस तिथि को उन लोगों का Pitru Shraddha किए जाने का विधान है, जिन्होंने संन्यास लिया हो !

  • त्रयोदशी : इस तिथि में जिन बच्चों की अकाल मृत्यु हुई हो उनका Pitru Shraddha किया जाता है ।
  • चतुर्दशी : इस तिथि में शस्त्र, आत्म-हत्या, विष और दुर्घटना यानि जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो उनका Pitru Shraddha किया जाता है ।
  • सर्वपितृमोक्ष अमावस्या : किसी कारण से पितृपक्ष की अन्य तिथियों पर पितरों का श्राद्ध करने से चूक गये हैं या पितरों की तिथि याद नहीं है ! तो इस तिथि पर सभी पितरों का Pitru Shraddha किया जा सकता है । 

शास्त्र अनुसार इस दिन श्राद्ध करने से कुल के सभी पितरों का श्राद्ध हो जाता है! यही नहीं जिनका मरने पर संस्कार नहीं हुआ हो, उनका भी अमावस्या तिथि को ही श्राद्ध करना चाहिये । बाकी तो जिनकी जो तिथि हो, श्राद्धपक्ष में उसी तिथि पर श्राद्ध करना चाहिये यही उचित भी है ! 

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