अहोई अष्टमी व्रत पूजा विधि || Ahoi Ashtami Vrat Puja Vidhi

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अहोई अष्टमी व्रत पूजा विधि || Ahoi Ashtami Vrat Puja Vidhi

कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष तिथियों में हिन्दू धर्म के त्योहारों की भरमार देखने को मिलती है ! इन मुख्य: त्योहारों में से करवा चौथ और अहोई अष्टमी महिलाओं के द्वारा किए जाने वाले विशेष दो त्योहारों पर्व हैं। यह व्रत कार्तिक माह लगते ही अष्टमी तिथि को किया जाता है| जिस वार की दीपावली होती है अहोई आठें भी उसी वार की पड़ती है| इस व्रत को वे स्त्रियाँ ही करती हैं जिनके सन्तान होती हैं | Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Trivedi द्वारा बताये जा रहे अहोई अष्टमी व्रत पूजा विधि || Ahoi Ashtami Vrat Puja Vidhi को करके आप भी बहुत ही आसानी तरीखें से पूजा करके फायदा व् लाभ उठा सकते है !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 7821878500 Ahoi Ashtami Vrat Puja Vidhi By Astrologer Acharya Pandit Lalit Trivedi

अहोई अष्टमी व्रत पूजा विधि || Ahoi Ashtami Vrat Puja Vidhi

अहोई अष्टमी व्रत पूजा कब की है ? || Ahoi Ashtami Vrat Puja Kab Ki Hai ? : 

Ahoi Ashtami Vrat Puja को अक्टूबर महीने की 31 तारीख़, वार बुधवार के दिन बनाई जायेगीं !

अहोई अष्टमी व्रत पूजा सामग्री || Ahoi Ashtami Vrat Puja Samagri : 

चोकी या पटरा, जल से भरा लोटा, स्याऊ ( चांदी से बनी हुई अहोई माता जिसमे चाँदी के दो दाने होते हैं )   

अहोई अष्टमी व्रत पूजा मुहूर्त || Ahoi Ashtami Vrat Puja Muhurt : 

संध्या के 04:19 मिनट से सूर्य अस्त तक रहेगा ! इस दिन तारे उदय शाम 6:00 बजे के बाद होगें !

अहोई अष्टमी व्रत पूजा विधि || Ahoi Ashtami Vrat Puja Vidhi : 

संध्या के समय सूर्यास्त होने के बाद जब तारे निकलने लगते हैं तो अहोई माता की पूजा प्रारंभ होती है। सायंकाल दीवार पर अष्ट कोष्ठक की अहोई की पुतली रंग भरकर बनाएँ| पूजन से पहले जमीन को स्वच्छ करके, पोछा चोका लगाकर एक लोटा जल भरकर एक पटरे पर कलश की भांति रखकर पूजा करें| भक्ति भाव से पूजा करें। बाल-बच्चों के कल्याण की कामना करें।

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मांगलिक दोष निवारण || Mangal Dosha Nivaran

दी गई YouTube Video पर क्लिक करके मांगलिक दोष के उपाय || Manglik Dosh Ke Upay बहुत आसन तरीके से सुन ओर देख सकोगें !

इसमें एक खास बात यह भी है कि पूजा के लिए माताएँ चाँदी की एक अहोई भी बनाती हैं जिसे बोलचाल की भाषा में स्याऊ भी कहते हैं उसमें चाँदी के दो दाने ( मोती डलवा लें ) जिस प्रकार गले के हार में पैंडिल लगा होता है उसी की तरह चाँदी की अहोई डलवा लें और डोरे में चाँदी के दाने डलवा लें| फिर अहोई की रोली, चावल, दूध व भात से पूजा करें| जल से भरे लोटे पर सतिया बना लें| एक कटोरी में हलवा तथा रुपए बायना निकालकर रख लें और सात दाने गहूँ के लेकर कहानी सुने| कहानी सुनने के बाद अहोई स्याऊ की माला गले में पहन लें| जो बायना निकालकर रखा था, उसे सासू जी के पांव लगाकर आदर पूर्वक उन्हें दे दें|

इसके बाद चन्द्रमा को अर्ध्य देकर स्वयं भोजन करें| दीपावली के बाद किसी शुभ दिन अहोई को गले से उतारकर उसका गुड़ में भोग लगाये और जल के छीटे देकर मस्तक झुकाकर रख दें| जितने बेटे हैं उतनी बार तथा जितने बेटों का विवाह हो गया हो उतनी बार चाँदी के दो-दो दाने अहोई में डालते जायें| ऐसा करने से अहोई माता प्रसन्न हो बच्चों की दीर्घायु करके घर में नित नए मंगल करती रहतीं हैं| इस दिन पंडितों को पेठा दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है ! 

अहोई का उजमन :

जिस स्त्री को बेटा हुआ हो अथवा बेटे का विवाह हो गया है या हुआ हो तो उसे अहोई माता का उजमन करना चाहिए| एक थाली में सात-सात पूडियाँ रखकर उनपर थोड़ा थोड़ा हलवा रखें| इसके साथ ही एक साड़ी ब्लाउज उस पर सामर्थ्यानुसार रूपये रखकर थाली के चारो ओर हाथ फेरकर श्रद्धापूर्वक सासू जी के पांव लगवाकर वह सभी समान सासू जी को दे दें| तीयल तथा रूपये सासू जी अपने पास रख लें तथा हलवा पूरी का बायना बाँट दें| बहन-बेटी के यहाँ भी बायना भेजना चाहिए |

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